हेलो दोस्तों अगर आप स्कूल में पढ़ रहे हैं तो आपके स्कूल की बुक में एक क्वेश्चन जरूर होगा रस की परिभाषा बताइए तो दोस्तों आज की इस पोस्ट में मैं आपको यही बताने वाला हूं वैसे तो रस की परिभाषा बहुत ही सरल है आप इसे एक बार में समझ जाएंगे

रस की परिभाषा - Ras in Hindi 

रस की परिभाषा :- किसी कविता कहानी नाटक उपन्यास आदि को पढ़ने सुनने यह देखने के बाद जो हमें एक प्रकार का विलक्षण आनंद प्राप्त होता है उसे रस कहते है।

किसी काव्य की पठान श्रवण या अभिनय दर्शन पाठक श्रोता अभिनय दर्शक का जब हर लेता मन और अलौकिक आनंद से जब मन तन में हो जाता मन का यह रूप काव्य में रस कहलाता है

इस प्रकार हम रस को काव्य का आनंद मान सकते हैं क्योंकि हमें समय-समय पर परिस्थितियों के अनुसार हृदय में विभिन्न अनेक प्रकार के भाव उत्पन्न होते हैं उन भावो के अनुरूप ही रस की अनुभूति होती है

रस के अंग

रस की चार अंग होते है

स्थाई भाव
विभाव 
अनुभाव
संचारी भाव

स्थाई भाव  :- मानव हृदय में (  असामाजिक या दर्शक या पाठक ) स्थाई रूप से विद्यमान  रहने वाले भाव को स्थाई भाव कहते हैं इन्हें छिपाया नहीं जा सकता ,इनके स्वरूप में परिवर्तन नहीं होता है

संचारी भाव :-  आश्रय के चित में जल्दी-जल्दी उत्पन्न होने वाले अस्थिर मनोविकार को संचारी भाव कहते हैं

संचारी भाव की संख्या वैसे तो अनगिनत मानी गई है किंतु इसकी संख्या मुख्यतः 33 संख्या मानी गई है

अनुभाव :- आश्रय की बाहरी  चित्तो का अनुभव करना अनुभाव हैं, इसे एक प्रकार से नाटक करना कहते हैं जैसे अगर आपके सामने भालू खड़े हो गया तो आप कापेंगे , चीखेंगे, हाथ-पांव मारने लगेंगे ,भागने की कोशिश करेंगे यह अनुभव के उदाहरण है

विभाव :- स्थाई भाव की कारण जो भाव उत्पन्न होता है उसे विभाव कहते हैं कहते हैं अथवा कोई भी परिस्थिति जिसके कारण स्थाई भाव उत्पन्न होता है उन्हें विभाव कहते हैं

विभाव की दो भेद होते हैं आलंबन विभाव और उद्दीपन विभाव

आलंबन विभाव :-  इससे भाव जिसका सहारा पाकर  स्थाई भाव उत्पन्न होते हैं उन्हें आलंबन विभाव कहते हैं इसके 2 कारण है  आश्रय ,विषय

उद्दीपन विभाव :-  जो भाव तुरंत उत्पन्न होता है अर्थात जल्दी-जल्दी उत्पन्न होता है अपने उद्दीपन विभाव कहते है

इसके दो प्रकार होते हैं (1)  बाहरी वातावरण  (2 ) विषय की बाहरी चेस्टाये

रस के प्रकार

श्रृंगार रस :- सहृदय के हृदय में रति नामक स्थाई भाव के उत्पन्न होने पर प्रेम संबंधी वर्णन को श्रृंगार रस कहते हैं श्रृंगार रस को रसराज कहा गया है

हास्य रस :- सहृदय के हृदय में ऐसे भाव होते है जब हास्य यह व्यंग संबंधित वर्णन होती है तब वहां हास्य रस होता है

वीर रस :- सहृदय की हृदय में स्थित उत्साह नामक स्थाई भाव का जब विभाव अनुभव एवं संचारी भाव से सहयोग हो जाता है तब वीर रस के रूप में बदल जाता है

करुण रस :- सहृदय की हृदय में जब शोक विभाव अनुभाव और संचारी भाव से सहयोग हो जाता है तब शोक करुण रस के रूप में बदल जाता है

रौद्र रस :- सहृदय की हृदय में स्थित क्रोध नामक स्थाई भाव का संयोग जब विभाव अनुभव संचारी भाव से हो जाता है तब वह रूद्र क्रोध रस के रूप में बदल जाता है

वीभत्स रस :- सहृदय की हृदय में स्थित घृणा नामक की स्थाई भाव का जब भी भाव अनुभव तथा संचारी भाव से सहयोग हो जाता है तब विभाग सिरस के रूप में बदल जाता है

भयानक रस :- सहृदय के हृदय में स्थित बलवान की स्थाई भाव को जब विभाव अनुभव तथा संचारी भाव से सहयोग हो जाता है तब वह भयानक रस के रूप में बदल जाता है

अद्भुत रस :- सहृदय के हृदय में स्थित विषम में आश्चर्य का जब विभाव अनुभव तथा संचारी भाव से सहयोग हो जाता है तब अद्भुत रस का रूप ग्रहण कर लेता है

शांत रस :-  सहृदय के हृदय में विरक्त उत्पन्न स्थाई भाव का जो विभाव अनुभव तथा संचारी भाव से सहयोग हो जाता है तब वह शांत रस का रूप ग्रहण कर लेता है

वात्सल्य रस :- सहृदय के हृदय में स्थित वात्सल्य नामक स्थाई भाव का जब विभाव अनुभव और संचारी भाव से सहयोग हो जाता है तो वह वात्सल्य रस के रूप में बदल जाता है

तो दोस्तों आज की इस पोस्ट में मैंने आपको रस की परिभाषा और उसके उदाहरण बताएं इसके अलावा इस पोस्ट में मैंने आपको रस के कितने भेद होते हैं यह बताएं अगर आपको जो पोस्ट पसंद आई तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूलें


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